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हमारी दुनिया_दारी, दुकानदारी!

हमारी दुनिया,

हमारे लोग

हमारा घर

हमारा परिवार

हमारे साथी

हमारा समुदाय

हमारी दुनिया



मेरा घर  तुम्हारा घर

मेरे लोग तुम्हारे लोग

मेरा परिवार तुम्हारा परिवार

मेरे साथी तुम्हारे साथी

मेरे बच्चे तुम्हारे बच्चे

मेरी औरतें तुम्हारी औरतें

मेरी इज्जत तुम्हारी इज्जत

मेरा समुदाय तुम्हारा समुदाय

मेरी ताकत तुम्हारी कमजोरी

तुम्हारी ताकत मेरी कमजोरी



मेरी बंदूक तुम्हारी बंदूक

मेरी लड़ाई मेरी जीत

तुम्हारी हार मेरी जीत  

तुम्हारी जीत मेरी हार 

तुम्हारा नुकसान मेरा फायदा

मेरा नुकसान तुम्हारा फायदा

तुम्हारी बर्बादी, मेरी ...?

मेरी जीत?

मेरी जीत मेरी हार!



बिखरा समुदाय

टूटे घर

भूखे पेट

अनाथ बच्चे

कैसा परिवार ?

मैं बर्बाद तुम बर्बाद

कौन आबाद ?

मेरी लड़ाई तुम्हारी लड़ाई

किसकी कमाई ?

मेरा पैसा तुम्हारा पैसा

किसके पास ?



मेरी भूख तुम्हारी भूख

मेरे दर्द तुम्हारे दर्द

मैं चुप तुम खामोश

खामोशी में हम

हमारे सच

हमारी ज़िंदगी

हमारा परिवार

हमारे बच्चे 

हमारी दुनिया !

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2026 वही पुराना नया साल!

नया साल आया है, लेकर वहीं पुराना सवाल आया है? मणिपुर, गाजा, सूडान, का ख़्याल आया है, देहरादून में त्रिपुरा की हत्या का बवाल आया है, सेंगर के बलात्कार का नया हाल आया है? वोट चोरी का क्या कोई निकाल आया है? उमर की बेल को कोई मिसाल आया है? जज साहेब बिके हुए हैं, सत्ता नरभक्षी है, कलेक्टर सारे डरे हुए हैं, विपक्षी अपनी गद्दियों में धंसे हुए है, पत्रकार सब दरबारी बने हुए हैं, सरकार के इश्तहार बने हुए हैं! आप और हम बॉटल में सड़ता अचार हुए हैं! हिंदुत्व का चरम है, और इसका कैसा मर्म है? मुसलमान इंसान नहीं? दलित का कोई संज्ञान नहीं? औरत इज्ज़त है, लूटने वाला सामान! नहीं? झूठ का बोलबाला हो, सच जैसे भुलावा हो, तारीख़ बदली जाएगी, भगवा इबारत आएगी, बाकी रंग शहीद होंगे, राम के सारे ईद होंगे! फिर भी साल मुबारक हो, देखिए वह जो पसंद हैं, धागा किसी का हो, आपकी पतंग है! अच्छा है इतनी उमंग है, सबका अपना ढंग है, अपनी अपनी पसंद है, हम (मैं भी) क्या करें, जो करोड़ की मुट्ठी तंग है, कपड़े उनके पैबंद हैं, सारे फीके रंग हैं! मुबारक 2026 मुबारक

मेरे गुनाह!

सांसे गुनाह हैं  सपने गुनाह हैं,। इस दौर में सारे अपने गुनाह हैं।। मणिपुर गुनाह है, गाजा गुनाह है, जमीर हो थोड़ा तो जीना गुनाह है! अज़मत गुनाह है, अकीदत गुनाह है, मेरे नहीं, तो आप हर शक्ल गुनाह हैं! ज़हन वहां है,(गाज़ा) कदम जा नहीं रहे, यारब मेरी ये अदनी मजबूरियां गुनाह हैं! कबूल है हमको कि हम गुनहगार हैं, आराम से घर बैठे ये कहना गुनाह है!  दिमाग चला रहा है दिल का कारखाना, बोले तो गुनहगार ओ खामोशी गुनाह है, जब भी जहां भी मासूम मरते हैं, उन सब दौर में ख़ुदा होना गुनाह है!

जी हुज़ूर!

हुजूर भी हैं हम जीहुजूर भी हैं, पास हैं चाहे कितने दूर भी हैं! मंजूर भी हैं, नामंजूर भी हैं, अपनी खुशी से मजबूर भी हैं! कमजोर भी हैं और शूर भी हैं, बदलते लम्हों के मशकूर भी हैं! काबिल हैं दोनों अपने आप के, जरूरत नहीं फिर जरूर भी हैं! बेअदबी के कायल हैं दोनों, अपनी गुस्ताख़ी के शु'ऊर भी हैं! मलहम हैं तो नासूर भी हैं, इंसाँ हैं मखमली काफ़ूर नहीं हैं! शराफ़त नहीं है इस रिश्ते में, आम हैं हम खजूर नहीं हैं! मंज़िल नहीं रास्ते हैं रिश्ते, हमसफर हैं जन्नत जरूर नहीं हैं! साथ है यही मुकम्मल बात है, करवा की मंगल सूत्र नहीं है! बनी है वही बात जो बिगड़ी है, जेहन का क्या जज़्बात नहीं हैं?